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18/05/2011


उदासियों के भार ढोने नहीं देती
आंखें मेरी मुझको, रोने नहीं देती
आते हैं जाने कितने ही तूफ़ां
हौसला ओ जिद कश्ती डूबोने नहीं देती
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हर वक्त किसी न किसी जोड-तोड, जुगाड में रहते हैं
किसी को थापने और किसी को उखाड में रहते हैं
सब कायल हैं उनकी काबलियत के यारों!
किसी सरकार के नहीं हैं, पर सरकार में रहते हैं
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कितने खुशकिस्मतों को नसीब है हंसी
जाने कितनों की जान, कहां कहां फ़ंसी
नसीबों की बात, किसी को आती नहीं हंसी 
किसी की रुकती नहीं हंसी
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हौसलों के हमने अपने पर जो फ़डफ़डाए,
आसमां से भी आगे कई आसमां नजर आए
जितना आजमाना है आजमाले ऎ तकदीर
डर है हमारे हौसलों से, कहीं तू ही न डर जाए
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किसी को हमारी याद आती नहीं
किसी की याद हम से जाती नहीं
कुछ ऎसी ही खामख्वाह वजहों की वजह से
नींद रात भर आती नहीं
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न जाने उनके कितने झूठ पकडे जाते रहे
फ़िर भी वे सच का झंडा लिए मंचों की शोभा बढाते रहे
सारी अदालतों के फ़ैसलों के खिलाफ़
तथाकथित ईमानदारी पर मदमदाते रहे
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तुम्हारा तो मकसद ही हमेशा बिखेरना रहा है
और मेरी कोशिशें हमेशा सम्भलना रहा है
तुमने कभी कोई कमी नहीं रखी कहने और सुनाने में
मेरा तो स्वभाव ही सुनना, चुप रहना, सहना रहा है
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